लेख/मंथन

महंगाई बड़े काम की चीज़ है/ लेखक: सैयद सलमान अहमद

महंगाई बड़े काम की चीज़ है/ लेखक: सैयद सलमान अहमद



देश के दरवाज़े पर महंगाई का अटैक प्रत्यक्ष में तो सिर्फ सब्सिडी वाले सिलेंडर पर ही हुआ है..पर परोक्ष में इसकी अनगिनत तहें हैं..जिनकी गिनती करना गुजराती गदहों के शरीर का बाल गिनने के सामान है…पुरानी पीढ़ी को याद हो तो नई पीढ़ी का यही अनुभव है कि महंगाई कभी घटी नहीं बढ़ी ही है..फिर भी महंगाई बढ़ाने वाली सरकार को जनता माफ़ कर देती है..और बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार के नारे को बिना कायम चूर्ण और पचनोल के पचा जाती है..महंगाई तब भी बढ़ी जब कांग्रेस का राज था..और अब भी दिन दुगुनी रात चौगुनी बढ़ रही है जब बीजेपी की सरकार है..महंगाई और वक़्त को भला कोई रोक पाया है ?

फर्क बस इतना है कि तब महंगाई बीजेपी बहिनों को अखरती थी..आज कांग्रेसी भाइयों को सता रही है..असल में कीमत कभी गिरेंगी नहीं और ना ही काबू में आएंगी..और आजकल तो ये कुछ ज़्यादा ही तेज़ी से सीढ़ियां चढ़ रही हैं और वो भी आम आदमी की जेब दर जेब, आंख दर आंख और कंधा दर कंधा मिलाकर बिल्‍कुल अंधा करती हुई..वैसे मैं कोई अर्थशास्त्री तो नहीं..पर इतना ज़रूर जानता समझता हूं कि जब महंगाई का प्रहार होता है तो उससे लोग सिर्फ़ दुखी नहीं होते, सुखी भी होते हैं..जिनका सस्ते में ख़रीदा गया माल महंगा बिकता है, तब वो खुश होते हैं और जब अपनी ख़रीदारी के लिए ज़्यादा कीमत चुकाते हैं तो दुखी हो जाते हैं..अब ऐसे समझिये, सिलेंडर महंगा हुआ…तो बेचने वाला खुश ही होगा, खरीदने वाले को थोड़ा फटका लगेगा..मतलब सबका साथ सबका विकास..अगर अब भी नहीं समझे तो इस चुटकुले का लाइव चित्रण कीजिये..

एक डॉक्टर ने एक गिलास दारू में एक कीड़ा डाला..थोड़ी ही देर में कीड़ा मर गया तो डॉक्टर ने अपने मरीजों से जानना चाहा कि इससे क्या सीख मिली? सभी मरीज एक स्वर में बोले कि डॉक्टर साहब, दारू पीना अच्छी बात है, इससे पेट के सारे कीड़े मर जाते हैं। हंसिए मत साहब..बस दारु पीजिये मस्त रहिये!!!

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