लेख/मंथन

शर्मशार होती मानवता/ एक दर्द भरी दास्ताँ

ये तस्वीर अमेरिका के ओलम्पिया शहर की रहने वाली रेचल कोरी की है। जो दशकों पहले अपनी स्नातक स्तर की पढाई को बीच में छोड़कर अपने मुल्क से बहुत दूर फलस्तीन चली गई थीं।आखिर रेचल कोरी फलस्तीन गयीं क्यों? क्योंकि वहां साम्राजवादी ताकतों की सरपरस्ती में इसराइल, गाजा पट्टी की जमीन हड़प रहा था, मानवता को लगातार शर्मशार कर रहा था। इसलिए फ़लस्तीनियों के दुःख में शामिल होने एवं उनके संघर्षों में साथ देने के लिए गाजा पट्टी आई थीं।
जानते हो फिर रेचल कोरी के साथ क्या हुआ? रेचल कोरी एक इस्राइली बुलडोजर के सामने खड़ी हो गईं जो एक फ़लस्तीनी नागरिक का घर गिरा रहा था। रेचल कोरी इस्राइली बुलडोजर और फ़लस्तीनी नागरिक के घर के बीच में खड़ी हैं। आखिरकार इस्राइली बुलडोजर इनको कुचल देता है ये मात्र 23 वर्ष की उम्र में मारी जाती हैं।
इंसानी रिश्तों एवं मानवीय संवेदना की ये एक बेहतरीन मिसाल है। जब एक इंसान मुल्क, समाज, रंग, नस्ल, धर्म से ऊपर उठकर न्याय एवं मानवता के पक्ष में लड़ाई लड़ता है और अपनी जान तक गँवा देता है।
हालांकि रेचल कोरी का मुल्क अमेरिका है जिसका इसराइल सबसे अच्छा दोस्त है इसलिए अमेरिकी राष्ट्रवाद के अनुसार रेचल कोरी को इसराइल का साथ देना चाहिए।

लेकिन इस नौजवान लड़की में आखिर वह कौन सी प्रेरणा थी कि वो अमेरिकी राष्ट्रवाद से निकल कर एक फ़लस्तीनी नागरिक के घर को बचाने के लिए एक इस्राइली बुलडोजर के सामने खड़ी हो जाती हैं। 

वो प्रेरणा है दर्द के रिश्ते की। दुनिया में इससे बेहतरीन रिश्ता कोई और नहीं है।

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