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​समाजवादी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा है कि प्रदेश सांप्रदायिक तनाव की आग में झुलस रहा है।

समाजवादी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा है कि प्रदेश सांप्रदायिक तनाव की आग में झुलस रहा है। लगभग एक दर्जन जनपदों में डर और दहशत का वातावरण है। समाज का हर वर्ग प्रताड़ित है। युवाओं पर दमनचक्र चल रहा है। समाज को तोड़ने वाली गतिविधियों को भाजपा के शीर्ष स्तर से संरक्षण मिलने से पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर अराजकता का विस्तार हो रहा है। रह-रहकर उसका वीभत्स रूप दिखाई देने लगा है। कानून का राज कहने भर के लिए ही रह गया है। 

      पिछले दो दिनों में प्रदेश में सांप्रदायिकता का जैसा उभार देखने को मिला है उससे प्रदेश के एक बड़े वर्ग में बेचैनी और आतंक व्याप्त है। जनसामान्य को अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकाएं बढ़ रही हैं। कानून के तहत समाज के सभी वर्गों को अपने-अपने धार्मिक विश्वास के अनुसार जूलूस निकालने की आजादी है। भाजपा सरकार ने उस पर भी आघात किया। 

      सŸाारूढ़ दल के समर्थक कानून के साथ खिलवाड़ करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। विश्वविद्यालयों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की गतिविधियों को संरक्षण दिया जा रहा है और असहमति के विरोध को देशद्रोह तक की संज्ञा दी जाने लगी है जबकि लोकतंत्र सहिष्णुता के वातावरण में ही जीवंत है। इलाहाबाद, वाराणसी, लखनऊ, दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू में छात्र असंतोष है। आज वाराणसी विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने श्री अखिलेश यादव से मुकालात कर अपना दर्द बयान किया। उनका कहना था कि बीएचयू में छात्राओं के साथ प्रशासन बर्बरता से पेश आया और अब उन्हें झूठे मुकदमें में फंसाने की साजिशें हो रही हैं।

      जहां तक अल्पसंख्यकों का सवाल है भाजपा-आरएसएस की सोच मूलतः इनके विरोध की है। वर्तमान भाजपा सरकार ने भी प्रशासन और संघ कार्यकर्Ÿााओं को खुली छूट दे दी है कि वे अल्पसंख्यकों को अपनी सनक का शिकार बनाएं। संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। भाजपा की विचारधारा समाज को तोड़ने की हैं क्योंकि उसकी पूरी राजनीति जातिवाद और सम्प्रदायवाद पर टिकी है। 

      आमजन का मानना है कि श्री अखिलेश यादव के शासनकाल में बेहतर कानून व्यवस्था का राज था। तब बिना रागद्वेष के और बिना बदले की भावना के शासन चलता था। जनता के दुःख दर्द के प्रति श्री अखिलेश यादव संवेदनशील थे। पीड़ितों को तुरन्त मदद देते थे। अपराधी तब डरते थे आज भाजपा राज में भयमुक्त हैं। समाजवादी सरकार कानून के राज को संरक्षण देती थी जबकि भाजपा कानून और संविधान दोनों की मर्यादा को तार-तार करने पर तुली है। 

                                     

                                      

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