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निकाय चुनाव में कांग्रेस ने चला ‘BBM’ कार्ड

उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में पार्टी सिम्बल पर चुनाव लड़ रही कांग्रेस की नजर अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाने की है. यही वजह है कि मेयर प्रत्याशियों के चयन में कांग्रेस ने अपने परंपरागत वोट बैंक को भी साधने की कोशिश की है.

कांग्रेस ने इस बार ब्राह्मण, बनिया और मुस्लिम (बीबीएम) कार्ड चला है. महापौर की घोषित 16 में से सात सीटों पर कांग्रेस ने ब्राह्मण प्रत्याशी खड़ा किया है, जबकि नोटबंदी और जीएसटी से परेशान व्यापारियों को लुभाने के लिए तीन वैश्य उम्मीदवारों को भी टिकट दिया है. इसके अलावा दो मुस्लिम प्रत्याशी भी कांग्रेस के टिकट पर ताल ठोक रहे हैं.

राजधानी लखनऊ से कांग्रेस ने पहले पूर्व आईएस कुसुम शर्मा को मेयर प्रत्याशी बनाया था. लेकिन नामांकन के आखिरी दिन प्रत्याशी बदलते हुए पुत्तु अवस्थी की पत्नी प्रेमा अवस्थी को टिकट दे दिया. इसके अलावा विजय मिश्र इलाहाबाद से प्रत्याशी बनाए गए हैं. अयोध्या में शैलेंद्रमणि त्रिपाठी, अलीगढ़ में मधुकर शर्मा, गाजियाबाद में डाली शर्मा, कानपुर में वंदना मिश्रा व बरेली में अजय शुक्ला को मेयर पद के लिए मैदान में उतारा जा चुका हैं. सात ब्राह्मण चेहरे को मैदान में उतार कर कांग्रेस ने अपना अगड़ा कार्ड बखूबी खेल दिया है.

हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव में शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर ब्राह्मणों को लुभाने की कोशिश की गई थी, लेकिन समाजवादी पार्टी से गठबंधन होने के बाद मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी की औपचारिकता भी खत्म हो गई थी.हमारा फेसबुक पेज लाइक कीजिये

प्रदेश प्रवक्ता द्विजेन्द्र त्रिपाठी ने कहा, “यह बात सही है कि ब्राह्मण हमेशा से ही कांग्रेस के साथ रहा, लेकिन कुछ कमियां रहीं होगी कि वह बीजेपी की तरफ चला गया. लेकीन अब वह समझ चुका है कि उसके साथ क्या हुआ है. अब वह समझदार हो चुका है और बहुत ज्यादा की संख्या में कांग्रेस से जुड़ रहा है.”

वहीं कहा जा रहा है कि नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों से व्यापारी वर्ग नाराज है. लिहाजा निकाय चुनावों के माध्यम से कांग्रेस ने व्यापारियों को भी खुद से जोड़ने की कोशिश की है. कांग्रेस ने आगरा से विनोद बंसल, सहारनपुर में शशि वालिया और झांसी में पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य को मेयर उम्मीदवार घोषित किया है.

प्रदेश प्रवक्ता द्विजेन्द्र त्रिपाठी का कहना है कि व्यापारियों व उद्यमियों में पनपा गुस्सा निकाय चुनाव के नतीजों को भी प्रभावित करेगा. त्रिपाठी ने कहा कि नोटबंदी ने तो लोगों की कमर तोड़ी ही थी, जीएसटी तो व्यापारियों पर कहर बनकर टूटी है. केंद्र के इस दोनों ही फैसलों सभी वर्गों को नुकसान हुआ है. इसका खामियाजा इस चुनाव में बीजेपी को भुगतना पड़ेगा.कांग्रेस ने फीरोजाबाद और मुरादाबाद में मुस्लिम प्रत्याशी उतारकर अल्पसंख्यक वर्ग को भी रिझाने की कोशिश की है. मुरादाबाद से रिजवान कुरैशी और फीरोजाबाद से शाहजहां परवीन को मेयर पद के लिए प्रत्याशी घोषित किया गया है.

त्रिपाठी ने कहा कि कांग्रेस कभी भी जाति या धर्म की राजनीति नहीं करती. कांग्रेस कभी भी हिंदू-मुस्लिम के नाम पर टिकट नहीं देती. जो भी सही प्रत्याशी होता है उसे मैदान में उतारा जाता है. उन्होंने कहा कि देश की जनता जानती है कि बीजेपी का अगर कोई विकल्प है तो वह कांग्रेस है.कांग्रेस ने पिछड़ा वर्ग में यादवों को तरजीह देकर समाजवादी वोटबैंक में भी सेंध लगाने की कोशिश की है. गोरखपुर में राकेश यादव को चुनाव मैदान में उतारा है तो वाराणसी में शालिनी यादव को मेयर प्रत्याशी घोषित किया गया है. इसके अलावा आरक्षित सीटों मथुरा-वृंदावन से मोहन सिंह और मेरठ से ममता सूद वाल्मीकि को महापौर पद उम्मीदवार बनाया है.

कांग्रेस प्रवक्ता ने निकाय चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर कहा कि उनकी सीधी टक्कर बीजेपी से है. निकाय चुनाव में कांग्रेस मजबूती से चुनाव लड़ रही है. यह चुनाव कांग्रेस और बीजेपी के बीच में है. केंद्र और प्रदेश दोनों ही जगह बीजेपी की सरकार है. बीजेपी ने देश को किस गर्त में पहुंचा दिया है अब इसका अंदाजा सभी को हो चूका है. वहीं प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमरा गई है.

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