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निर्दलीय चुनाव लड़ रही राष्ट्रपति की बहू, ये है वजह

उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा कानपुर देहात की झींझक नगर पालिका की है. यहां की पालिका में चेयरमैन पद के लिए खड़े बीजेपी प्रत्याशी के खिलाफ देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की बहू ने चुनौती पेश कर दी है. राष्ट्रपति की बहू के निर्दलीय मैदान में उतरने के ऐलान से पार्टी में हड़कंप मच गया है.

वैसे इस चुनौती के पीछे वाकया भी दिलचस्प है. दरअसल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के भतीजे पंकज कोविंद की बहू दीपा कोविंद ने पहले बीजेपी से टिकट को आवेदन किया था. लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया.यही नहीं दीपा के साथ राष्ट्रपति की बड़ी भाभी विद्यावती ने भी चेयरमैन चुनाव के लिए आवेदन किया था लेकिन बीजेपी ने उनके आवेदन को भी तरजीह नहीं दी. टिकट न मिलने के बाद विद्यावती ने चुनाव से दूरी बना ली.हमारा फेसबुक पेज लाइक कीजिये

इधर दीपा ने बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के बाद भी चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया. वह निर्दलीय मैदान में उतर गई हैं. दीपा ने अपने घर में चुनाव कार्यालय खोला है. सभी घरवाले कार्यालय में चुनाव जीतने की गणित बिठा रहे हैं.दीपा का कहना है वह अपनी महिला समर्थकों के सहारे चुनाव लड़ रही हैं. इसमें वह अपने ससुर का सहयोग नहीं लेंगीं. उनका कद काफी बड़ा है. वह चुनाव जीतने के बाद झींझक का विकास करेंगीं.झीझक नगर निकाय करीब 100 साल पुरानी है. जिला मुख्यालय से दूर होने के कारण यहां विकास ज्यादा नहीं हुआ है.बीजेपी ने चेयरमैन पद के लिए सरोजनी देवी कोरी को टिकट दिया है. सरोजनी देवी के पति शिवकुमार का कहना है की राष्ट्रपति की बहू के चुनाव लड़ने से हमारा कोई नुकसान नहीं होगा बल्कि फायदा होगा. उनमें और हमारे में कोई फर्क नहीं है.

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