लेख/मंथन

​संघी परिवार संविधान बदलने का तैयार कर रहा है प्लेटफार्म:चौधरी जावेद अहमद खान

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के सुप्रीमो मोहन भागवत जी का कहना है कि भारत का संविधान विदेशी सोच पर आधारित है इसलिए संविधान की समीक्षा एवं उसमें बदलाव की आवश्यकता है! 
साथा-संत कबीर नगर: चौधरी जावेद अहमद खान लोकसभा प्रभारी बहुजन मुक्ति पार्टी संत कबीर नगर ने बताया कि भागवत जी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि संविधान की कौन-कौन से अनुच्छेद एवं कौन-कौन सी धाराएं अथवा उप धारा विदेशी सोच पर बनाई गई है या पूरा का पूरा संविधान विदेशी सोच पर आधारित है! साथ ही यह भी उन्होंने खुलासा नहीं किया कि कौन-कौन से विदेशियों की सोच पर भारत का संविधान अथवा कौन सा अनुच्छेद किस विदेशी की सोच पर निर्मित किया गया था और इस बात का भी उन्होंने खुलासा नहीं किया जब संविधान का निर्माण हो रहा था उस वक्त संविधान निर्माताओं को कौन-कौन सी धाराओं पर RSS द्वारा क्या एतराज दर्ज करवाया गया जोकि विदेशियों की सोच पर निर्माण किया जा रहा था उस वक्त भी RSS नामक संगठन पूरे भारत के कोने कोने में पांव पसार चुका था आखिर क्या वजह थी उस समय अर्थात 26 जनवरी 1950 के पूर्व RSS ने विदेशी सोच पर बन रहे संविधान के खिलाफ मजबूती से राष्ट्रव्यापी आंदोलन कर के विरोध नहीं किया!
शायद इसलिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन नहीं किया गया क्योंकि इतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक इनका देश की आजादी जंगे आजादी में योगदान ना होने की वजह से विरोध करने में शर्माते रहे होंगे इसलिए उस समय इन्होंने राष्ट्रव्यापी आंदोलन नहीं किया,  समय के साथ परिस्थितियां बदलती रहती हैं और उनकी परिस्थितियों के अंतर्गत अब लज्जित होने वाले व्यक्तियों का टोटा RSS में पहले से ही  था  वर्तमान में और हो गया है इसी का प्रतिफल है कि वर्तमान समय में इस साजिश के तहत यह सगुफा फैलाकर संविधान बदलने का Platform तैयार किया जा रहा है भागवत जी अभी थोड़ा यह बात कहने में संकोच कर रहे हैं कि भारत का संविधान मनुस्मृति के अनुरूप होना चाहिए!
यदि भागवत जी को सचमुच यही लगता है कि भारत का संविधान विदेशी सोच पर आधारित है तो नैतिकता के आधार पर भारत के मूल निवासियों को अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत संविधान परिवर्तन अथवा  समीक्षा की जिम्मेदारी सौंप दें जिन्हें नैतिक रुप से संविधान में परिवर्तन एवं उसकी समीक्षा करने का अधिकार है परंतु वह मूलनिवासी चाटुकारिता में लिप्त ना हो!
RSS और उसके ऑफ सूट संगठनों द्वारा बार-बार संविधान के बारे में  जो टिप्पणियां की जा रही हैं उसपर  अल्प संख्यक समुदाय सहित SC ST OBC के लोगों को भी इस पर गौर करते हुए चल रही साजिश रूपी तलवार के वार से बचने का उपाय तलाश करना होगा

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