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पूना पैक्ट की साजिश नहीं होती तो आज बाबा साहेब के अनुयायी ही चुनाव जीतते: मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को डॉ भीमराव अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर पार्टी के प्रदेश र्कायालय पर अम्बेडकर प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की.

इस दौरान मायावती ने कहा कि अगर पूना पैक्ट के लिए आमरण अंशन आदि के माध्यम से बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर को हर प्रकार से मजबूर न किया गया होता तो आज लोकसभा, विधानसभा, मेयर और अन्य आरक्षित सीटों पर विरोधी पार्टियों में बंधुआ मजदूर बने नेताओं की बजाए दलित और पिछड़ा वर्ग के अम्बेडकर अनुयायी चुनाव जीतते.

बसपा ने बुधवार को प्रदेश के सभी 18 मंडलों में संगोष्ठी और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए. इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल, अम्बेडकर स्मारक आदि पर माल्यार्पण किया.मायावती ने कहा कि इतने महान व्यक्तित्व को विरोधी पार्टियों की सरकारों द्वारा उपेक्षा ही की गई.यूपी की योगी सरकार पर हमला करते हुए मायावती ने कहा कि बहुमत की सरकार होने के बाद भी यूपी में अपराध और कानून व्यवस्था में लापरवाही दिख रही है.

जनता में आक्रोश है, जिसका परिणाम सामने आने लगा है. यूपी नगर निकाय चुनाव में बीजेपी के मुख्यमंत्री, मंत्री अपने-अपने इलाके में भी चुनाव हार गए. मेयर चुनाव में ईवीएम धांधली से पार्टी अपनी लाज बचा सकी.मायावती ने कहा कि गुजरात विधानसभा चुनाव में अगर ईवीएम में धांधली नहीं की गई तो बीजेपी को यहां करारी हार का सामना करना पड़ सकता है.

पूना पैक्ट अथवा पूना समझौता महात्मा गांधी और डॉ बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के बीच पुणे की यरवदा सेंट्रल जेल में 26 सितम्बर, 1932 को हुआ था. अंग्रेज सरकार ने इस समझौते को सांप्रदायिक अधिनिर्णय (कॉम्युनल एवार्ड) में संशोधन के रूप में अनुमति प्रदान की.समझौते में दलित वर्ग के लिए पृथक निर्वाचक मंडल को त्याग दिया गया लेकिन दलित वर्ग के लिए आरक्षित सीटों की संख्या प्रांतीय विधानमंडलों में 71 से बढ़ाकर 147 और केन्द्रीय विधायिका में कुल सीटों की 18 प्रतिशत कर दी गईं.

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